जम्मू-कश्मीर के बाद अब कर्नाटक में अलग झंडे की तैयारी
बेंगलुरु।

बेंगलुरु। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने राज्य के लिए अलग झंडे की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए उसने नौ सदस्यीय समिति बनाई है, जिसे झंडा डिजाइन का करने और इस संबंध कानूनी स्थिति पर रिपोर्ट देने को कहा गया है।

अगर यह फैसला लागू होता है तो जम्मू-कश्मीर के बाद यह देश का दूसरा राज्य होगा, जिसका अपना झंडा होगा। यह कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब कुछ ही महीने में राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

जानेमाने कन्नड़ लेखक पाटिल पुट्टप्पा और सामाजिक कार्यकर्ता भीमप्पा गुंडप्पा गडाडा की मांग पर राज्य सरकार ने पिछले महीने यह समिति बनाई।

कन्नड़ और संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। अलग झंडा के लिए समिति गठन के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने कहा कि क्या संविधान में कोई प्रावधान है जो राज्य को अपना झंडा रखने की मनाही करता है।

विधानसभा चुनाव से पहले यह कदम उठाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि चुनाव अभी नहीं, अगले साल अप्रैल-मई में होंगे। भाजपा पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, क्या भाजपा के लोग यह कह सकते हैं कि वे कर्नाटक के लिए झंडा नहीं चाहते।

भाजपा ने किया विरोध

सिद्दरमैया सरकार का यह कदम भाजपा के रुख के विपरीत है। केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा ने इस कदम को खारिज करते हुए कहा कि भारत एक राष्ट्र है और इसके दो झंडे नहीं हो सकते।

2012 में सदानंद गौड़ा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने कर्नाटक हाई कोर्ट से कहा था कि राज्य के लिए अलग दोरंगा कन्नड़ झंडा स्वीकार्य नहीं है।

कन्नड़ झंडा

लाल और पीले रंग का कन्नड़ झंडा अनधिकृत तौर पर हर साल एक नवंबर को राज्य की स्थापना दिवस के अवसर पर जगह-जगह फहराया जाता है।

कन्नड़ कार्यकर्ता इसे स्कार्फ के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं। 1960 के दशक में वीरा सेनानी एमए राममूर्ति ने इसे डिजाइन किया था।

शिवसेना ने असंवैधानिक बताया

शिवसेना नेता संजय राउत ने राज्य के अलग झंडा के लिए कर्नाटक सरकार के कदम को असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि यह देश की अखंडता के खिलाफ है। राउत ने राज्य सरकार को बर्खास्त कर वहां राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की।

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