गर्भवती संग 'सामूहिक दुष्कर्म' का फरमान
कोलकाता

कोलकाता, [जेएनएन] उसकी खता सिर्फ इतनी थी कि उसने घर लौटते वक्त बस में परिचित युवक के साथ बात की थी। लेकिन यह बात शायद समाज के उन ठेकेदारों को रास नहीं आई जो झूठी शान के लिए जीते हैं। आदिवासी महिला की आजादी को वह उसकी गुस्ताखी समझ बैठे। फिर क्या था समाज के ठेकेदारों ने महिला को सजा देने के लिए सालिसी सभा बुलाकर ऐसा तुगलकी फरमान सुनाया कि जिसे सुन लोगों का सिर शर्म से झुक जाना लाजिमी है।

समाज सुधारकों ने गर्भवती महिला को उसकी गुस्ताखी के एवज में डेढ़ लाख का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा नहीं करने पर परिवार की मौजूदगी में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का फैसला सुना दिया गया। लेकिन सात माह पेट से होने पर वह इस फैसले से तो बच गई लेकिन समाज के ठेकेदारों के कोप से नहीं बच सकी। ब्लेड से महिला के बाल काटकर गांव में घुमाया गया। इसके बाद उसे मायके भेज दिया गया। पीडि़ता ने आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। हालांकि समाज को शर्मसार करने वाली इस घटना में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। 

क्या है मामला 

सूत्रों के अनुसार मालदा जिले के गाजोल थाना अंतर्गत अलाल ग्राम पंचायत के पहाड़ भीटा गांव निवासी करीब 35 वर्षीय आदिवासी महिला का पति अन्य राज्य में मजदूरी का काम करता है। महिला अपनी तीन कन्या संतान के साथ ससुराल में रहती है। वर्तमान में वह सात माह की गर्भवती भी है। गत दिनों वह गाजोल से बाजार करके बस से गांव लौट रही थी। बस में एक परिचित व्यक्ति के पास बैठकर वह बातचीत कर रही थी। यह नजारा गांव के कुछ तुच्छ मानसिकता वाले लोगों को खटक गई थी। उन्होंने समाज के ठेकेदारों को महिला के साथ गैर मर्द से संबंध होने की सूचना दे दी थी। हाल ही में महिला का पति गांव लौटा तो उसे पत्‍‌नी के बदचलन होने की बात बताकर सजा दिए जाने का निर्णय लिया गया। पति की रजामंदी के बिना गत शुक्रवार को सालिसी सभा बुलाई गई। 

जुर्माना नहीं देने पर बाल काटकर गांव में घुमाया

आरोप है कि सभा में परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में आदिवासी महिला पर उसकी गुस्ताखी के लिए डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। लेकिन परिवार ने जुर्माना चुकाने की हैसियत नहीं होने का हवाला दिया। इससे गुस्साए समाज के ठेकेदारों ने महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का फरमान सुना दिया। लेकिन सात माह की गर्भवती होने के कारण महिला को सजा से मुक्त कर दिया गया और बेइज्जत करने बाद महिला को जाने दिया गया। आरोप है कि उसी रात करीब 12 बजे कुछ लोग उसे घर से जबरन उठा ले गए और एक बार फिर सालिसी सभा बुलाई गई। फिर से महिला के परिवार को जुर्माना अदा करने के लिए कहा गया। इस दफा भी इन्कार करने पर ब्लेड से महिला के बाल काट कर जूतों की माला पहना कर गांव में घुमाया गया। समाज के हाथों बेइज्जत होने के बाद महिला भाबुक गांव में अपने मायके जा पहुंची। ग्रामीणों की मदद से पीडि़ता ने गाजोल थाने में सात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवा दी। घटना के बाद से आरोपी फरार हैं। 

हो रही है जांच : पुलिस 

गाजोल थाना पुलिस ने छेड़छाड़ समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सब इंस्पेक्टर राणा साहा को जांच अधिकारी बनाया गया है।

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