किसान हितों के लिए कई मुख्यमंत्रियों से लड़ी लड़ाई इस नेता ने, काटी जेल
हिसार।

हिसार। भारतीय किसान यूनियन के प्रधान घासीराम नैन का मंगलवार देर शाम निधन हो गया। वे 87 साल के थे। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें हिसार के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार को जींद की नरवाना तहसील स्थित पैतृक गांव लोहचब में अंतिम संस्कार होगा। निसिंग, कंडेला या फिर मंडियाली, जहां-जहां किसानों पर ज्यादती हुई, वहां घासीराम नैन किसानों के हक में खड़े हुए। चौ. भजनलाल, चौ. बंसीलाल और 

ओमप्रकाश चौटाला

 की सरकारों में घासीराम नैन ने जेल काटी। यूपी, पंजाब व राजस्थान में किया हक का झंडा बुलंद...

- उन्होंने न केवल हरियाणा, बल्कि पंजाब, यूपी, दिल्ली और राजस्थान तक के किसानों को हक दिलाने के लिए आंदोलन किए जेल यात्राएं कीं। प्रधानजी के नाम से प्रसिद्ध रहे घासीराम भले ही आज नहीं रहे, लेकिन किसानों के लिए लड़ने वाले मुख्य किसान-सिपाही रहे। 

- नरवाना के गांव लोहचब निवासी घासीराम ने किसानों के लिए 1975-76 में गेहूं के मुद्दे पर आंदोलन किया। वह 1980 में भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष बने थे। उन्होंने निसिंग, कंडेला मंडियाली के आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और किसानों की आवाज उठाई।

- 1982 में लोहारू में किसानों का आंदोलन शुरू हुआ। वहां सरकार के साथ लड़ाई में महावीर नामक किसान की जान चली गई।

- बाद में आंदोलन उग्र हुआ तो सरकार ने घासीराम के नेतृत्व में किसानों के हक देने का फैसला किया। 1985 के दौरान हरियाणा में बिजली मुद्दे को लेकर फिर आंदोलन खड़ा हुआ। 

- वहां सरकार ने शिकंजा कसते हुए घासीराम नैन को जेल भेज दिया। 1987-88 के दौरान यूपी के किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के संपर्क में आए। मेरठ आंदोलन के दौरान नैन ने मेरठ तक पैदल यात्रा की और 14 दिन में वह मेरठ पहुंचे। 

- भजनलाल सरकार के दौरान बिजली के मुद्दे पर दो बार आंदोलन हुए। 22 अगस्त 1995 में कादमा के 

किसान आंदोलन

 में 4 किसान मारे गए थे। 

- बंसीलाल सरकार के दाैरान महेंद्रगढ़ जिले मंढियाली गांव में 10 अक्टूबर 1997 को किसान आंदोलन हुआ। उस दौरान भी 4 किसान पुलिस की गोलियों के शिकार हुए। 

- तब घासीराम नैन ने मैदान में आकर किसानों के हक में तत्कालीन मुख्यमंत्री से लड़ाई लड़ी। उनके साथ कैथल के जियालाल भी डटे रहे, जिन्होंने आगे बढ़कर नैन को पुलिस की गोलियों से बचाया। 

- किसान आंदोलन 37 महीने चला। बाद में चौटाला की सरकार गई। घासीराम के नेतृत्व में हर बार जीत किसानों की हुई।

YOUR REACTION?

Facebook Conversations



Disqus Conversations