एक जैसे होते हैं न्यूक्लियर रियेक्टर और शिवलिंग, इसलिए करना होता है ये
इंदौर

इंदौर।महाकाल मंदिर में शिवलिंग के क्षरण को रोकने के लिए आंकड़े की माला पर रोक लगा दी गई है, लेकिन शिवलिंग में चढ़ाई जाने वाली सामग्री शिवलिंग के लिए बहुत जरूरी है। इन सब की अपनी-अपनी महत्ता है। शिवलिंग और पूजन सामग्री के बीच की उपयोगिता को समझने के लिए एक शाेध किया गया है। इस शोध में सामने आई जानकारी आमजनों के लिए किसी रहस्य से कम नहीं है। यह शोध उज्जैन के धर्म विज्ञान शोध संस्थान के वैज्ञानिकों ने शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाली पूजन सामग्री को लेकर है।

- शोध में दावा किया है कि न्यूक्लियर रियेक्टर और शिवलिंग में समानता होती है। इसलिए ज्योतिर्लिंग पर रेडिएशन अधिक होता है। रेडिएशन के कारण आवेश अधिक न हो इसलिए शिवलिंग पर लगातार जल चढ़ाया जाता है। पूजन में आक यानी आंकड़े के फूल व बिल्व पत्र चढ़ाए जाते हैं, जो कि न्यूक्लियर ऊर्जा को सोखते हैं। न्यूक्लियर में आग के पदार्थ कार्डिएक ग्लाएकोसाइट्स कैल्शियम ऑक्सीलेट, फेटी, एसिड, यूरेकिन, टोक्सिन आदि पाए जाते हैं। इन्हें सोखने से शिवलिंग के क्षरण का कोई खतरा नहीं रहता है।

- धर्म और विज्ञान पर अध्ययन करने वाली इस संस्था ने शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाली चीजों की प्रकृति और उनमें पाए जाने वाले तत्वों की वैज्ञानिक व्याख्या के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है। इस संस्था की पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं।

- अध्ययन के मुताबिक सतत पंचाक्षरी मंत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र की आवृति पदार्थों का विखंडन करती है और माइक्रो पॉवर में बदलकर औषध रूप बना देती है। लगातार औषध और जल डालने से न्यूक्लियर विखंडन के ऊर्जा से स्वत: ही उपचार होता रहता है।

- संस्थान के वरिष्ठ धर्म वैज्ञानिक डॉ. जे जोशी के अनुसार आंकड़ा, बिल्व पत्र आदि से शिवलिंग को क्षरण का खतरा नहीं है। वहीं साइंस कॉलेज के भूविज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. आरएन तिवारी का कहना है शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले पदार्थों का टेस्ट मानक स्तर की लैब में होना चाहिए, तभी प्रामाणिकता मानी जा सकती है।

- गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया व पुरातत्व विभाग की टीम महाकाल में जांच कर चुकी है। टीम ने गर्भगृह में चढ़ रही फूलों की बड़ी मालाओं पर आपत्ति जताई थी। उसके बाद मंदिर प्रशासन ने इस पर रोक लगाई थी।

जानिए किस पदार्थ में क्या

- दूध में फेट, प्रोटीन, लैक्टिक एसिड व दही में विटामिन्स, कैल्शियम, फॉस्फोरस व शहद में फ्रुक्टोस, ग्लूकोज जैसे डाईसेक्राइट, ट्राईसेक्राइट, प्रोटीन, एंजाइम्स होते हैं।

दूध, दही व शहद कवच

- दूध, दही, शहद शिवलिंग पर कवच बनाए रखते हैं। ध्वनि आवेशित ऊर्जा ब्रह्मांड में धनात्मक परिवर्तन करने में सहायक है। (धर्म वैज्ञानिक वैभव जोशी के अनुसार) 

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