इनोला अल्मोड़ा न्यूज़
सल्ट मे मिली गूंच कैटफ़िश तो ग्रामीणों ने खूब करी दावत -- अब जाना होगा जेल

सल्ट मे मिली गूंच कैटफ़िश तो ग्रामीणों ने खूब करी दावत -- अब जाना होगा जेल 

एक बेहद ही सवेंदनशील घटनाक्रम मे रामगंगा नदी मे मिली गूंच मछली का ग्रामीणों ने शिकार कर दिया

यु तो उत्तराखंड को प्रकर्ति के अध्भुत कारनामो के लिए जाना जाता है मगर कुछ घटनाये इस लिए भी घटित हो जाती है क्योकि हमारा प्रशाशन सोया रह जाता है, जानकारी के आभाव मे पर्वतीय जनपदों मे आम आदमी कितनी बड़ी गलती कर देता है इसका एक जीता जागता उद्धरण है कल साल्ट क्षेत्र के एनोला गांव का घटनाक्रम.

नदियों के निकट रहने वाले लोगो को मछली का शिकार करना एक रोजमर्रा का काम है हालाकि प्रशाशन ने मछली को मारने मे प्रतिबन्ध लगा रखा है लेकिन फिर भी लोग शिकार करने से बाज़ नहीं आते. ये घटना भी हमारे सोये हुए वन विभाग को नींद से जगाने का काम करती है 

रोज की तरह इस गांव के शिकारी रामगंगा नदी मे जाल डाल कर मतस्य आखेट कर रहे थे मगर सबके होश तब उड़गए जब उनके जाल मे गूंच (बेगैरियस यार्रेल्ली - वैज्ञानिक नाम) मछली फस गयी, इस मछली का वजन लगभग १५० किलो था और ये लगभग ५ फ़ीट लम्बी थी, इस पकड़ मे आते ही ग्रामीणों मे खलबली मच गयी और कुछ देर तो किसो को कुछ समझ नहीं आया, लेकिन इसके बाद ग्रामीणों ने उसको एक बॉस के डंडे मे बांध कर गांव की ओर ले जाना हे बेहतर समझा. गांव मे पहुंचते ही लोगो मे मछली के साथ फोटो खिचवाने की होड लग गयी और यही उनकी गलतियों पर से पर्दा उठ गया, मछली गांव मे पहुंचने के बाद भी जीवित थी और अगर समय रहते उसको वापस नदी मे डाल दिया होता तो शायद इस संरक्षित मछली की जान भी बच जाती 

क्या है गूंच मछली?

गूंच मछली दक्षिणी एशिया मे पाए जाने वाली कैटफ़िश प्रजाति की मछली है जो साफ़ एंड तीव्र धारा मे   रहती है, यह मछली वन्य जीव संरक्षण कानून के तहत "नियर थ्रेटनड" श्रेणी मे आती है,  इससे पहले ये मछली १९९८-२००७ के बीच भी काली नदी मे नरभक्षी मछली के रूप मे सामने आये थी, अभी तक इस प्रजाति की मछली को ३ इंसानो को खा जाने की बात भी आ चुकी है.  इस मछली का इतने बड़ा होने के पीछे ये भी कहा जाता है की ये मरे हुए लोगो के अधजले शरीर को खाने की वजह से नरभक्षी बनी नेशनल जियोग्राफिक चैनल भी कर चूका है इस मछली को काली नदी मे पकड़ने का काम .

कन्ज़रवेटर फारेस्ट श्री पराग मधुकर धकाते ने बताया की उनको भी ये जानकारी सोशल मीडिया और आपसब के पसंदीदा चैनल MH7 के माध्यम से मिली है और उन्होंने अल्मोड़ा के प्रभागीय वनाधिकारी एस प्रजापति जी को इसकी जांच करने के आदेश दे दिए है, प्रजापति जी से संपर्क करने पर पता चला की उन्होंने उप प्रभागीय वनाधिकारी चन्दन गिरी गोस्वामी तथा जौरासी रेंज की रेंजर संचिता वर्मा के नेतृत्व मे एक दल गांव भेज दिया है और टीम ने गांव मे डेरा डाल रखा है, गांव वालो को पुलिस और वन विभाग की टीम का आने का पता चलते ही शिकारी युवक गांव छोड़ कर भाग गया, श्री प्रजापति ने ये भी बताया की ये मछली संरक्षित प्रजाति की A श्रेणी मे आती है और इसका शिकार करने पर ७ साल का सक्षम कारावास या जुर्माना या फिर दोनों हो सकता है. अभियुक्तों पर वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के सेक्शन 9 (39 )/51 के तहत कार्यवाही की जाएगी  वही पुलिस अभियुक्तों की गिरफ़्तारी को लगातार दबिश दे रही है.

संदीप पांडेय

ब्यूरो चीफ कुमाऊँ

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